
Durga ki Aarti / दुर्गा माता की आरती के बारे में समझें
दुर्गा माता की आरती/ Durga ki Aarti हिंदू धर्म में एक प्रमुख पूजा प्रक्रिया है जो माता दुर्गा को समर्पित होती है। यह आरती माता के प्रति भक्ति, प्रेम, सम्मान, और संकल्प को प्रकट करने का एक माध्यम है। इसे संपूर्ण समयों में, विशेषतः पौराणिक महीनों में, पुण्यतिथियों पर, और नवरात्रि के 9 दिनों में पढ़ना सुनना प्रसिद्ध है।हिंदी भाषा में दुर्गा माता की आरती पढ़ने का कारण हमारे संस्कृति और धार्मिक महत्व को प्रकट करने के साथ-साथ हमें दुर्गा माता की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक माध्यम भी है। हिंदी भाषा में पढ़ने से हमें संकल्प, सत्य, प्रेम, संयम, अहिंसा, और समरसता की महत्वपूर्णता को समझने में मदद मिलती है।
दुर्गा माता की आरती/Durga ki Aarti हिन्दी भाषा में पढ़ने की महत्वता:
- हिन्दी भाषा में प्रस्तुति: हिन्दी आरती पढ़ने से हमें हिन्दी भाषा को संप्रेषित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम प्राप्त होता है।
- संकल्प को समझने में सहायता: आरती पढ़ने के माध्यम से हमें संकल्प की महत्वपूर्णता को समझने में मदद मिलती है।
- संस्कृति और परंपरा को बनाए रखने का एक माध्यम: हिन्दी भाषा में प्रस्तुत होने से हमारी संस्कृति, परंपरा, और धार्मिकता को बनाए रखने में सहायता मिलती है।
हिन्दी भाषा में प्रस्तुति:
हिन्दी भाषा में दुर्गा माता की आरती/Durga ki Aarti पढ़ने का प्रमुख कारण है कि हिन्दी हमारी प्रमुख और राष्ट्रीय भाषा है। हिन्दी भाषा को संप्रेषित करने का यह एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जो हमें हिन्दी भाषा के महत्व को सुनिश्चित करता है। इसके साथ-साथ, हिन्दी में पढ़ने से हमें भारतीय संस्कृति, परंपरा, और धार्मिकता को प्रस्तुत करने में मदद मिलती है।
हिन्दी आरती पढ़ने से हमें हिन्दी भाषा को संप्रेषित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम प्राप्त होता है।
प्रमुख प्रसंग:
- 1. “जय अम्बे गौरी” – इस प्रसंग में, माता दुर्गा की महिमा, शक्ति, और प्रेम का वर्णन किया जाता है।
- 2. “तुम ही हो माता” – इस प्रसंग में, माता के सभी रूपों की पूजा की जाती है और माता के सभी गुणों का स्मरण किया जाता है।
- 3. “तेरे सरकार हैं” – इस प्रसंग में, माता को सर्वोपरि स्थान प्राप्त होता है और उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।
हिंदी भाषा में दुर्गा माता की आरती /Durga ki Aartiपढ़ने का कारण
दुर्गा माता की आरती/Durga ki Aarti पढ़ने का प्रमुख कारण है उनके भक्तों द्वारा उनकी पूजा-अर्चना के माध्यम से माँ दुर्गा से संपर्क स्थापित करने की इच्छा। हिन्दू धर्म में, माँ दुर्गा संसार की सृष्टि, संहार, और पालन-पोषण की शक्ति हैं, और उनकी पूजा-प्रार्थना से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
हिंदी में आरती प्रसिद्ध होती है , श्री दुर्गा सप्तशती, नवरात्रि पूजन, महानवमी, और दुर्गा पूजा के अवसरों पर। हिंदी भाषा में आरती पढ़ने से माँ दुर्गा के समृद्धि, सुख, समृद्धि, स्थिरता, और माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती हैं।
हिंदी में आरती प्रसिद्ध होने के कारण:
- हिन्दू धर्म में माँ दुर्गा को महत्वपूर्ण संसारिक-संकल्पना माना जाता हैं
- हिन्दी भाषा में प्रकाशित होने से समस्त हिन्दी-बोलने वाले लोग इसे समझ सकते हैं
- हिन्दी में आरती पढ़ने से माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती हैं
हिंदी में आरती प्रसिद्ध होने का समय:
हिन्दी में आरती का समय, प्रात:काल (सुबह), सायंकाल (संध्या), और रात्रि (रात) में किया जा सकता हैं। हिन्दू परंपरा में, सुबह-सुबह आरती प्रमुख होती हैं, संध्या के समय श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ-साथ, महानवमी, और नवरात्रि के दौरान भी आरती पढ़ी जाती हैं।
हिंदी में आरती पढ़ने से प्राप्त होने वाले स्लोकों की संख्या:
हिन्दी में आरती पढ़ने में, मुख्यत: 7-8 स्लोक होते हैं, जिनमें माँ दुर्गा की महिमा, गुण, और कृपा का वर्णन किया जाता हैं।
हिंदी में प्रमुख प्रसंगों पर ध्यान देने वाली दुर्गा माता की आरती:
हिन्दू परंपरा में, समस्त प्रसंगों, सप्तशति (700) सलोकों के साथ पढ़ी जाती हैं। इसके अलावा, नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा की महिमा, प्रत्येक रूप के सम्बन्ध में स्लोकों का पठन किया जाता हैं।
जानिए दुर्गा माता की आरती /Durga ki Aarti को पढ़ने का समय
दुर्गा माता की आरती /Durga ki Aarti को पढ़ने का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए संस्कृति और परंपरा में निर्धारित समय होता है, जिसे मान्यताओं के अनुसार प्रकट किया जाता है। सामान्यत: मंदिरों में, प्रतिदिन सुबह-संध्या के समय, दुर्गा माता की आरती प्रकट होती है।
संकल्प स्त्रोत सहित दुर्गा माता की आरती/Durga ki Aarti में होने वाले स्लोकों की संख्या
दुर्गा माता की आरती/Durga ki Aarti में होने वाले स्लोकों की संख्या अलग-अलग प्रकार की हो सकती है। इसमें कुछ आरतियों में १०-१२ स्लोक होते हैं, जबकि कुछ में २०-३० स्लोक होते हैं। यह संख्या प्रतिष्ठित पुराणिक कथाओं, मान्यताओं और स्थलीय परंपराओं पर आधारित होती है।
प्रमुख प्रसंगों पर ध्यान देने वाली दुर्गा माता की आरती
दुर्गा माता की आरति/Durga ki Aarti में कुछ प्रमुख प्रसंग होते हैं, जिनपर विशेष ध्यान दिया जाता है। इन प्रसंगों में से कुछ श्लोक होते हैं, जिन्हें आरती के दौरान पढ़ा जाता है। यह प्रमुख प्रसंग सामान्यत: माँ दुर्गा की महिषासुरमर्दिनी स्वरूप, माँ काली, माँ चमुंडा, माँ सिद्धिदात्री, माँ सरस्वती, माँ लक्ष्मी, माँ कौशला, माँ सन्तोषी, माँ अनन्या-प्रेम-प्रसन्ना, माँ भुवनेश्वरी, माँ पूतला-प्रसन्ना, महिषमर्दिनी संकल्प-प्रसंग, आरति के सम्पूर्ण प्रसंगों को समेटते हैं। संक्षेप में, “दुर्गा की आरती” हिंदी भाषा में एक महत्वपूर्ण संस्कृतिक प्रथा है जो माता दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है।
https://hi.wikipedia.org/wiki/
दुर्गा माता की आरती / Durga ki Aarti
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे,सुर भयहीन करे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों ।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥